निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध मौत, चाय की दुकान के पास मिला शव; पुलिस जांच जारी

2006 के चर्चित निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस को उनका शव हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र में मिला है। शुरुआती जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई है, हालांकि पुलिस पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
हरिद्वार/नोएडा: देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल 2006 के निठारी कांड का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। निठारी मामले के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। पुलिस के अनुसार उनका शव हरिद्वार के सप्तऋषि (भूपतवाला) क्षेत्र में स्थित एक चाय की दुकान के पास फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन अभी तक मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही चल सकेगा।
हरिद्वार में चला रहे थे चाय की दुकान
जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहे थे। उन्होंने अपनी पहचान सार्वजनिक किए बिना भूपतवाला इलाके में एक छोटी चाय की दुकान शुरू की थी और वहीं से आजीविका चला रहे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार वह पिछले कुछ समय से इसी इलाके में रह रहे थे।
शुक्रवार सुबह लोगों ने दुकान के पास उनका शव देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
पुलिस क्या कह रही है?
हरिद्वार पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। मौके पर फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं और आसपास के लोगों से पूछताछ भी की जा रही है।
पुलिस के अनुसार फिलहाल उपलब्ध परिस्थितियां आत्महत्या की ओर इशारा करती हैं, लेकिन जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।
क्या था निठारी कांड?
निठारी कांड देश के सबसे सनसनीखेज आपराधिक मामलों में गिना जाता है। वर्ष 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव में कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने का मामला सामने आया था। बाद में एक मकान के पास मानव अवशेष मिलने से पूरे देश में सनसनी फैल गई।
इस मामले में व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर और उनके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान कई मामलों में सुरेंद्र कोली पर अपहरण, हत्या और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए। निचली अदालत ने उन्हें कई मामलों में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड भी सुनाया था।
कैसे बदला पूरा मामला?
निठारी मामले की कानूनी प्रक्रिया करीब दो दशक तक चली। समय के साथ अलग-अलग मामलों में अदालतों ने साक्ष्यों की जांच की और कई फैसले बदले।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कुछ मामलों में दोषसिद्धि रद्द की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी 2025 में अपीलों को खारिज करते हुए सुरेंद्र कोली को संबंधित मामलों में बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने जांच और साक्ष्यों को लेकर गंभीर सवाल भी उठाए थे।
मौत के बाद फिर चर्चा में आया निठारी मामला
सुरेंद्र कोली की मौत के बाद 2006 का निठारी कांड एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि वर्तमान जांच केवल हरिद्वार में हुई मौत की परिस्थितियों पर केंद्रित है और अभी किसी भी तरह की अटकलों से बचना चाहिए।
कुछ लोगों ने उठाए सवाल
इस बीच कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुरेंद्र कोली की मौत को लेकर सवाल भी उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं पुलिस ने कहा है कि ऐसे सभी दावों की जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। अभी तक किसी भी दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल हरिद्वार पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों का इंतजार कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सुरेंद्र कोली की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी अन्य पहलू की भी जांच की आवश्यकता है।
Anita Bisht
Correspondent · GroundWireDaily Media
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