नोएडा अथॉरिटी में किसका खेल? हाजीपुर से सलारपुर तक अवैध निर्माण पर बड़े सवाल

नोएडा के सेक्टर-104, हाजीपुर और सलारपुर में कथित अवैध निर्माण और जमीनों पर कब्जे का मामला फिर चर्चा में है। प्राधिकरण पहले भी अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। इस बीच सर्कल-8 के एक मैनेजर पर कथित मिलीभगत के आरोपों और ED की पूछताछ से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया और निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
नोएडा: नोएडा प्राधिकरण के अधिसूचित और अधिग्रहित जमीनों पर कथित अवैध निर्माण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। सेक्टर-104 के हाजीपुर और सलारपुर सहित आसपास के इलाकों में जमीनों पर कब्जे और अनधिकृत निर्माण को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच प्राधिकरण के एक सर्कल में तैनात अधिकारी की कथित भूमिका और भूमाफिया से मिलीभगत के आरोपों को लेकर भी चर्चा होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नोएडा प्राधिकरण के CEO कृष्णा करुणेश की ओर से सरकारी और अधिग्रहित जमीनों को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जमीनों पर अवैध निर्माण रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों की निगरानी कितनी प्रभावी है और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हो रही है या नहीं।
सेक्टर-104, हाजीपुर की जमीन पर प्राधिकरण की कार्रवाई
सेक्टर-104 स्थित हाजीपुर में जमीन से जुड़े विवाद पर सितंबर 2026 में प्राधिकरण ने बड़ी कार्रवाई की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, खसरा नंबर 412 की जमीन पर बने एक व्यावसायिक परिसर के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया। प्राधिकरण के मुताबिक, जमीन वर्ष 2002 में अधिग्रहित की गई थी, जबकि इस पर बाद में निर्माण किया गया था। अदालत से स्थगन आदेश से जुड़ी कानूनी बाधा हटने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
इस कार्रवाई से एक बार फिर यह मामला सामने आया कि अधिग्रहित जमीनों पर निर्माण और उनके स्वामित्व को लेकर विवाद किस तरह लंबे समय तक चल सकते हैं। ऐसे मामलों में जमीन के दस्तावेज, अधिग्रहण की स्थिति, न्यायालय के आदेश और निर्माण की अनुमति की जांच महत्वपूर्ण होती है।
सलारपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी अवैध निर्माण का मुद्दा
हाजीपुर के अलावा सलारपुर और भंगेल जैसे इलाकों में भी अधिसूचित जमीनों पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर प्राधिकरण पहले चेतावनी जारी कर चुका है। जून 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, प्राधिकरण ने लोगों को इन क्षेत्रों में अनधिकृत फ्लैट, प्लॉट या भवन खरीदने से सावधान किया था। प्राधिकरण ने ऐसी जमीनों पर कार्रवाई, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया था।
अवैध निर्माण का असर केवल भूमि प्रबंधन तक सीमित नहीं रहता। बिना स्वीकृत नक्शे या वैध भूमि अधिकारों के तैयार संपत्तियों को खरीदने वाले लोगों को आर्थिक नुकसान, कानूनी विवाद और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए किसी भी संपत्ति में निवेश करने से पहले उसके स्वामित्व, भूमि की स्थिति और निर्माण संबंधी स्वीकृतियों की जांच जरूरी है।
सर्कल-8 के मैनेजर पर कथित डील के आरोप
इस पूरे मामले के बीच प्राधिकरण के वर्क सर्कल-8 में तैनात एक मैनेजर की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, आरोप है कि अवैध निर्माण से जुड़े विवाद और कानूनी प्रक्रिया में मदद के नाम पर कथित डील की चर्चा हुई। यह भी दावा किया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी रात के समय निर्माण स्थल पर पहुंचे थे।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि करने वाले दस्तावेज, आधिकारिक बयान या जांच के निष्कर्ष फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए किसी अधिकारी की संलिप्तता या मिलीभगत को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। मामले में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित दस्तावेजों, स्थल निरीक्षण के रिकॉर्ड, शिकायतों और आधिकारिक प्रतिक्रिया की जांच आवश्यक है।
यदि किसी अधिकारी के खिलाफ नियमों के उल्लंघन या भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायत मिलती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। वहीं, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना भी उचित नहीं है।
ED की पूछताछ को लेकर दावे की पुष्टि जरूरी
दी गई जानकारी में यह भी दावा किया गया है कि जमीन और अवैध निर्माण से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने प्राधिकरण के तीन कर्मचारियों से पूछताछ की थी। हालांकि, इस दावे के सटीक मामले, कर्मचारियों की पहचान, पूछताछ की तारीख और आधिकारिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है।
इसलिए ED की कार्रवाई और कथित डील के बीच किसी संबंध का निष्कर्ष निकालना फिलहाल जल्दबाजी होगी। यदि इस संबंध में आधिकारिक बयान, जांच एजेंसी का रिकॉर्ड या विश्वसनीय दस्तावेज सामने आते हैं, तो मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
अब जांच और आधिकारिक जवाब पर निगाहें
हाजीपुर, सेक्टर-104 और सलारपुर में जमीनों से जुड़े मामलों ने सरकारी भूमि की सुरक्षा, अनधिकृत निर्माण पर समय रहते कार्रवाई और विभागीय जवाबदेही जैसे सवाल फिर सामने रखे हैं। प्राधिकरण के लिए जरूरी है कि ऐसे मामलों में शिकायतों की जांच, निर्माण की अनुमति का सत्यापन और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई पारदर्शी तरीके से हो।
साथ ही, सर्कल-8 के मैनेजर पर लगाए गए कथित आरोपों और ED की पूछताछ से जुड़े दावों पर संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन आरोपों को प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले की वास्तविक स्थिति निष्पक्ष जांच, दस्तावेजों और आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
Aarti Sharma
Correspondent · GroundWireDaily Media
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