NICDC ने AURIC स्मार्ट सिटी में शुरू किया क्रॉस-लर्निंग प्रोग्राम, देशभर के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में लागू होंगी सफल विकास मॉडल की सर्वोत्तम प्रथाएं

NICDC ने महाराष्ट्र के AURIC Smart City में दो दिवसीय Cross-Learning Programme शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य देशभर के औद्योगिक कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड स्मार्ट शहरों में AURIC की सफल योजना, डिजिटल गवर्नेंस, निवेशक-अनुकूल मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी सर्वोत्तम प्रथाओं को लागू कर औद्योगिक विकास को नई गति देना है।
नई दिल्ली/छत्रपति संभाजीनगर: देश में औद्योगिक बुनियादी ढांचे को और अधिक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (NICDC) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। NICDC ने महाराष्ट्र के AURIC (Aurangabad Industrial City) Smart City में दो दिवसीय Cross-Learning Programme की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर में विकसित किए जा रहे औद्योगिक कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड स्मार्ट इंडस्ट्रियल शहरों में सफल विकास मॉडल, तकनीकी नवाचार और प्रशासनिक सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) को साझा करना और उन्हें अन्य परियोजनाओं में लागू करना है।
AURIC बना औद्योगिक विकास का राष्ट्रीय मॉडल
यह कार्यक्रम NICDC और Maharashtra Industrial Township Limited (MITL) के संयुक्त सहयोग से महाराष्ट्र के शेंद्रा-बिडकिन इंडस्ट्रियल एरिया (AURIC Smart City) में आयोजित किया गया है। इसमें विभिन्न राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) प्रतिनिधि, प्रोग्राम मैनेजर, EPC कॉन्ट्रैक्टर्स और औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं से जुड़े अन्य हितधारक शामिल हुए हैं।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक शहरों की योजना, निर्माण, संचालन, डिजिटल गवर्नेंस और निवेश आकर्षित करने की रणनीतियों को साझा करना है ताकि देश के अन्य औद्योगिक कॉरिडोर भी AURIC की सफलता से सीख सकें।
रजत कुमार सैनी ने बताई AURIC की विशेषताएं
NICDC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं प्रबंध निदेशक रजत कुमार सैनी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि AURIC राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम (NICDP) के तहत विकसित एक आदर्श स्मार्ट औद्योगिक शहर बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि AURIC यह दर्शाता है कि विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेशक-केंद्रित योजना, तकनीक आधारित प्रशासन और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी किस प्रकार भारत को वैश्विक विनिर्माण (Manufacturing) का प्रमुख केंद्र बना सकती है। साथ ही उन्होंने परियोजनाओं के बेहतर संचालन के लिए SPVs को अधिक योजना संबंधी लचीलापन देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
प्रतिभागियों ने देखा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
कार्यक्रम के पहले दिन प्रतिभागियों को AURIC की मास्टर प्लानिंग, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया।
इस दौरान प्रतिभागियों ने—
- शेंद्रा-बिडकिन इंडस्ट्रियल एरिया के विकास मॉडल का अध्ययन किया।
- डिजिटल प्लानिंग एवं मॉनिटरिंग सिस्टम का प्रदर्शन देखा।
- औद्योगिक इकाइयों और प्रमुख उपयोगिता (Utility) परियोजनाओं का दौरा किया।
- कनेक्टिविटी, भूमि उपयोग और औद्योगिक अवसंरचना का निरीक्षण किया।
BHAVYA योजना पर भी हुई विस्तृत चर्चा
कार्यक्रम के दौरान भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के कार्यान्वयन पर भी विशेष चर्चा हुई। यह NICDC की प्रमुख योजना है, जिसके तहत देशभर में विश्वस्तरीय Plug-and-Play Industrial Parks विकसित किए जा रहे हैं।
प्रतिभागियों ने विचार-विमर्श किया कि AURIC की डिजिटल गवर्नेंस, निवेशक सुविधा प्रणाली, एकीकृत उपयोगिता नेटवर्क और मास्टर प्लानिंग जैसे मॉडल BHAVYA योजना के अंतर्गत विकसित होने वाले नए औद्योगिक पार्कों में किस प्रकार अपनाए जा सकते हैं। NICDC ने राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों से 31 जुलाई 2026 तक आवेदन करने का भी आग्रह किया।

उद्योगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के क्रॉस-लर्निंग कार्यक्रम राज्यों के बीच ज्ञान साझा करने की संस्कृति को मजबूत करेंगे। इससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का समाधान तेजी से होगा और विभिन्न राज्यों में विकसित हो रहे औद्योगिक कॉरिडोर अधिक कुशल, टिकाऊ और निवेश-अनुकूल बन सकेंगे।
चर्चाओं में सतत अवसंरचना (Sustainable Infrastructure), डिजिटल भूमि प्रबंधन, निवेशक-अनुकूल अनुमोदन प्रणाली, स्मार्ट शहरी प्रबंधन और भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं पर भी विस्तार से विचार किया गया।
भारत के औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति
राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम भारत सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी औद्योगिक अवसंरचना पहलों में से एक है। इसका उद्देश्य देशभर में आधुनिक औद्योगिक शहरों का विकास करना, वैश्विक निवेश आकर्षित करना, विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। AURIC जैसे सफल मॉडल से प्राप्त अनुभवों को अन्य परियोजनाओं में लागू करने से भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और मजबूत होने की उम्मीद है।
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Correspondent · GroundWireDaily Media
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