12 अगस्त को आसमान में डबल शो: सूर्य ग्रहण और उल्का बौछार एक साथ

12 अगस्त को स्काईवॉचर्स के लिए खास दिन है। इसी दिन आंशिक सूर्य ग्रहण और मशहूर पर्सिड उल्का बौछार दोनों एक साथ नजर आएंगी। एक अमेरिकी खगोलविद ने इसे देखने के टिप्स भी दिए हैं।
अगस्त महीने में आसमान देखने वालों के लिए एक खास मौका आ रहा है। 12 अगस्त को एक ही दिन दो बड़ी खगोलीय घटनाएं एक साथ होने वाली हैं - आंशिक सूर्य ग्रहण और मशहूर पर्सिड उल्का बौछार (Perseid meteor shower)। यह मेल काफी दुर्लभ माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर ऐसी घटनाएं अलग-अलग तारीखों पर होती हैं।
पर्सिड मेटियोर शावर 7 से 16 अगस्त के बीच सक्रिय रहेगा, और इसका पीक 12 अगस्त के आसपास ही पड़ रहा है। ठीक इसी दिन आंशिक सूर्य ग्रहण भी नजर आएगा। यानी जिन लोगों को आसमान देखने का शौक है, उनके लिए यह दिन डबल ट्रीट जैसा रहेगा।
एक अमेरिकी खगोलविद ने इस मौके पर लोगों को स्टारगेजिंग के लिए गाइडेंस दी है, ताकि लोग इन घटनाओं को सही तरीके से और सुरक्षित रूप से देख सकें।
क्या होती है पर्सिड उल्का बौछार?
पर्सिड उल्का बौछार हर साल जुलाई-अगस्त में दिखाई देती है। यह तब होती है जब धरती स्विफ्ट-टटल नाम के धूमकेतु के पीछे छोड़े गए धूल और मलबे के रास्ते से गुजरती है। जब ये छोटे-छोटे कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो घर्षण के कारण जलकर चमकदार रोशनी की लकीरें बनाते हैं, जिन्हें हम "टूटते तारे" कहते हैं। पर्सिड शावर को इसका नाम इसलिए मिला है क्योंकि ये उल्काएं आसमान में पर्सियस तारामंडल की दिशा से आती हुई दिखाई देती हैं। यह साल की सबसे तेज और भरोसेमंद उल्का बौछारों में गिनी जाती है।
सूर्य ग्रहण क्यों होता है?
सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा, धरती और सूर्य के बीच आ जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश कुछ समय के लिए पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक जाता है। आंशिक सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के केवल एक हिस्से को ढकता है, जिससे सूर्य का बचा हुआ भाग चमकता दिखाई देता है। यह घटना केवल दिन के समय ही देखी जा सकती है, और इसे नंगी आंखों से देखना खतरनाक हो सकता है, इसलिए विशेष सुरक्षा चश्मों का इस्तेमाल जरूरी होता है।
अमेरिका सहित दुनियाभर के कई हिस्सों में स्काईवॉचर्स इस दुर्लभ खगोलीय संयोग को देखने के लिए उत्साहित हैं।
Groundwire
Correspondent · GroundWireDaily Media
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