ज़ोहरा सहगल का बेबाक बयान: 97 साल की उम्र में कहा था- ‘जिंदगी में सेक्स भी उतना ही जरूरी’, आज भी चर्चा में हैं उनके विचार

102 वर्ष तक जीवंत और ऊर्जावान रहने वाली दिग्गज अभिनेत्री ज़ोहरा सहगल अपने अभिनय के साथ-साथ बेबाक बयानों के लिए भी जानी जाती थीं। 97 साल की उम्र में दिया गया उनका एक बयान आज भी चर्चा में है।
नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा और रंगमंच की दुनिया में ज़ोहरा सहगल का नाम एक ऐसी शख्सियत के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने उम्र को कभी अपनी पहचान पर हावी नहीं होने दिया। अभिनय, नृत्य और थिएटर की दुनिया में दशकों तक सक्रिय रहीं ज़ोहरा सहगल अपने चुटीले अंदाज, हास्यबोध और बेबाक व्यक्तित्व के लिए भी जानी जाती थीं। आज भी उनके कई पुराने इंटरव्यू सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन जाते हैं।
हाल ही में उनका एक पुराना बयान फिर से सुर्खियों में है, जिसमें उन्होंने 97 वर्ष की उम्र में जीवन, ऊर्जा और खुश रहने के अपने तरीके को लेकर खुलकर बात की थी। उस समय उनके जवाब ने लोगों को हैरान भी किया था और प्रेरित भी।
उम्र सिर्फ एक संख्या है, यह साबित करती थीं ज़ोहरा
ज़ोहरा सहगल उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थीं जिन्होंने 90 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी मंच और कैमरे से अपना रिश्ता बनाए रखा। उनका मानना था कि जीवन को पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ जीना चाहिए। यही कारण था कि बढ़ती उम्र के बावजूद उनकी सोच हमेशा युवा बनी रही।
एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि उनकी जीवंतता और ऊर्जा का राज क्या है, तो उन्होंने अपने खास अंदाज में जवाब दिया कि जीवन में हास्य और प्रेम बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनका यह जवाब वर्षों बाद भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
अभिनय से लेकर थिएटर तक छोड़ी अमिट छाप
ज़ोहरा सहगल का करियर आठ दशकों से भी अधिक समय तक फैला रहा। उन्होंने फिल्मों, टेलीविजन, थिएटर और नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। दर्शकों ने उन्हें ‘वीर-जारा’, ‘चीनी कम’, ‘दिल से’, ‘हम दिल दे चुके सनम’ और कई अन्य फिल्मों में यादगार भूमिकाओं में देखा।
उनकी खासियत केवल अभिनय तक सीमित नहीं थी। वे मंच पर अपनी उपस्थिति, संवाद अदायगी और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए भी जानी जाती थीं। उनके साथ काम करने वाले कलाकार अक्सर उनकी अनुशासनप्रियता और पेशेवर रवैये की प्रशंसा करते थे।
सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने वाली कलाकार
ज़ोहरा सहगल का पूरा जीवन परंपरागत सोच को चुनौती देने का उदाहरण माना जाता है। उन्होंने अपने समय में कई ऐसे फैसले लिए जिन्हें उस दौर में साहसिक माना जाता था। चाहे अंतरधार्मिक विवाह का निर्णय हो या फिर कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाना, उन्होंने हमेशा अपने रास्ते खुद चुने।
उनकी बेबाकी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे उम्र, रिश्तों और जीवन के निजी पहलुओं पर भी खुलकर बात करती थीं। यही वजह थी कि लोग उन्हें केवल अभिनेत्री नहीं बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में भी देखते थे।
बढ़ती उम्र और जीवन के प्रति बदलती सोच
विशेषज्ञों का भी मानना है कि बढ़ती उम्र के साथ भावनात्मक जुड़ाव, आत्मीयता और व्यक्तिगत संबंध व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। कई शोधों में यह पाया गया है कि उम्र बढ़ने के बावजूद लोगों की भावनात्मक और व्यक्तिगत जरूरतें समाप्त नहीं होतीं।
ज़ोहरा सहगल के विचारों को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जाता है, जहां वे जीवन को बिना झिझक और पूरे आत्मविश्वास के साथ जीने की बात करती थीं।
आज भी प्रेरणा हैं ज़ोहरा सहगल
साल 2014 में 102 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी जीवंत सोच और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण आज भी लोगों को प्रेरित करता है। सोशल मीडिया पर उनके पुराने वीडियो और इंटरव्यू समय-समय पर वायरल होते रहते हैं, जो यह याद दिलाते हैं कि उम्र चाहे जो भी हो, जीवन के प्रति उत्साह और जिजीविषा कभी कम नहीं होनी चाहिए।
ज़ोहरा सहगल ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि खुश रहने, सीखते रहने और खुद को अभिव्यक्त करने की कोई उम्र नहीं होती। शायद यही कारण है कि उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे जीवंत और यादगार हस्तियों में गिना जाता है।
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Correspondent · GroundWireDaily Media
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